रायपुर। रायपुर सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोगों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील का समर्थन किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष धरम भंसाली और सचिव जितेन्द्र गोलछा ने कहा कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ लंबे समय में सराफा व्यापार के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में वैश्विक युद्ध, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अस्थिरता और बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण सोने की कीमतों में लगातार अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर सराफा कारोबार पर पड़ा है। सामान्य आभूषण व्यापार सीमित होकर केवल बुलियन आधारित लेन-देन तक सिमट गया है, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार मूल्य अस्थिरता के कारण व्यापारियों को नुकसान और कारोबार में मंदी का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री की यह अपील भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सराफा बाजार को केवल सोना खरीदने-बेचने तक सीमित न रखकर “सेवा क्षेत्र” आधारित मॉडल के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि सोने के आयात में कमी आती है तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा और रुपये की स्थिति मजबूत होगी। इसका लाभ छोटे उद्योगों और अन्य व्यापारिक गतिविधियों को भी मिलेगा। इसे उन्होंने राष्ट्रहित में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भागीदारी बताया।
धरम भंसाली और जितेन्द्र गोलछा ने घरेलू स्तर पर निष्क्रिय पड़े सोने को “डेड कैपिटल” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की सोच का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बढ़ाना है। यदि लोग बैंकों, उद्योगों और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाते हैं तो रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
उन्होंने उपभोक्ताओं को बड़े कॉर्पोरेट ज्वेलरी ब्रांड्स की आक्रामक मार्केटिंग से सावधान रहने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि ऐसे मॉडल से बड़ी मात्रा में पूंजी देश से बाहर चली जाती है, जबकि स्थानीय सराफा व्यापार और पारंपरिक कारीगरों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
रायपुर सराफा एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से स्वर्ण शिल्प बोर्ड के गठन की मांग भी की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित जिन राज्यों में अभी तक ऐसा बोर्ड गठित नहीं हुआ है, वहां इसकी स्थापना की जानी चाहिए, ताकि पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों की कला और विरासत को संरक्षण मिल सके। साथ ही कारीगरों को सरकारी योजनाओं, रियायती ऋण, बीमा सुविधाओं और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ भी मिल सके।
एसोसिएशन ने कहा कि “मेक इन इंडिया” की अवधारणा को मजबूत करने के लिए पारंपरिक स्वर्ण शिल्प उद्योग को संरक्षण और संस्थागत समर्थन देना समय की आवश्यकता है।