नई दिल्ली। फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार को उनके साहस और सूझबूझ के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने की मांग उठी है। शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन मछार के नाम पर इस सम्मान के लिए विचार करने का आग्रह किया है।

दरअसल, 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान कॉकपिट में गंभीर घटना हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मछार पर हमला किया और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा। विमान में 174 लोग सवार थे।
घटना के दौरान कैप्टन मछार घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद क्रू के सदस्यों को कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला। विमान का रुख सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
घटना के बाद कैप्टन स्मित मछार को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और उनके साहस तथा सूझबूझ की सराहना की।
मिलिंद देवरा ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कैप्टन मछार के साहस और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से कैप्टन मछार के नाम पर अशोक चक्र के लिए विचार करने का अनुरोध किया है।
अशोक चक्र शांतिकाल में असाधारण वीरता के लिए भारत का सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान है। हालांकि, अभी कैप्टन स्मित मछार को अशोक चक्र दिए जाने का कोई सरकारी निर्णय नहीं हुआ है। फिलहाल यह सम्मान देने की मांग और सिफारिश सामने आई है।
वहीं, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने भी कैप्टन स्मित मछार के साहस को देखते हुए उनके लिए राष्ट्रीय वीरता सम्मान पर विचार करने का आग्रह किया है।