नवा रायपुर में 63 सीटों पर होगा प्रवेश, डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का जताया आभार
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 साल बाद प्रदेश को पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज मिलने जा रहा है। नवा रायपुर में शुरू होने वाले इस कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। कॉलेज को बीएचएमएस पाठ्यक्रम की 63 सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है। इस पहल को प्रदेश में आयुष चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने प्रदेश में पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रदेश में सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब इस संस्थान की शुरुआत से होम्योपैथी की पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को प्रदेश में ही बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
दैनिक भास्कर में 13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार के अनुसार, कॉलेज में प्रवेश नीट (NEET) की मेरिट के आधार पर होगा। कुल 63 सीटों में से न्यूनतम 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे के लिए निर्धारित होंगी।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा आयुष चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को महत्व देना भी सकारात्मक पहल है।
उन्होंने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध को बढ़ावा देना जरूरी है। नवा रायपुर में सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह संस्थान होम्योपैथी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. त्रिवेदी के मुताबिक, प्रदेश में पहले तीन निजी होम्योपैथी कॉलेज संचालित हुए थे। इनमें रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित महाराणा प्रताप होम्योपैथी कॉलेज और बिलासपुर का चौकसे होम्योपैथी कॉलेज बंद हो चुके हैं। वर्तमान में रायपुर के रामकुंड स्थित रायपुर होम्योपैथी कॉलेज में 35 सीटें हैं। ऐसे में सरकारी कॉलेज की शुरुआत से प्रदेश में होम्योपैथी की पढ़ाई के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि नए कॉलेज में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं, योग्य शिक्षक, बेहतर क्लिनिकल प्रशिक्षण और शोध की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश में पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत युवाओं और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए उत्साहजनक कदम है। इससे छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।