रायपुर। संस्कृत विषय बचाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ प्रदेश संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू, डॉ. नारायण साहू एवं मनोज कुमार वर्मा ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत से भेंट कर संस्कृत विषय की वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के पाठ्यक्रम से कक्षा छठवीं से दसवीं तक संस्कृत विषय को सचिवालय स्तर पर षड्यंत्रपूर्वक हटाया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने संस्कृत को पूर्व की भांति हरियाणा राज्य की तर्ज पर अनिवार्य विषय बनाने तथा संस्कृत के विकल्प के रूप में लागू की गई नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में स्थान देने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
संघ ने बताया कि इससे पूर्व भी अपनी मांगों को लेकर संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव एवं सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मंडलम्, स्कूल शिक्षा मंत्री, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा, दुर्ग एवं रायपुर के जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारियों, बेमेतरा, राजिम और डोंगरगांव के विधायकों सहित बलौदाबाजार जिले के अधिकारियों एवं पूर्व विधायक महंत रामसुंदर दास को भी मांग पत्र सौंपा जा चुका है।
संघ का आरोप है कि बिना किसी लिखित आदेश के सचिवालय स्तर पर मौखिक निर्देशों के आधार पर संस्कृत विषय के स्थान पर नवीन व्यावसायिक शिक्षा लागू की जा रही है। जबकि केंद्र सरकार द्वारा केवल व्यावसायिक ट्रेंड शुरू करने की बात कही गई है, न कि किसी विषय को हटाने की। इसके बावजूद प्राचार्यों और अधिकारियों के मौखिक निर्देशों पर छात्रों को संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला जैसे विषयों से हटाकर व्यावसायिक पाठ्यक्रम में भेजा जा रहा है।
संघ ने कहा कि संस्कृत, हिंदी और बांग्ला भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएं हैं और इनका अपमान संविधान के अनुच्छेद 351 का उल्लंघन है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों की मूल भाषा है। एक ओर जहां पूरा विश्व संस्कृत के महत्व को स्वीकार कर रहा है, वहीं प्रदेश में इसे पाठ्यक्रम से हटाने का प्रयास गंभीर चिंता का विषय है।
संघ ने यह भी बताया कि 07 सितंबर 2025 को मठपुरैना स्थित सरयू पारिण भवन में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को भी मांग पत्र सौंपा गया था। वहीं 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एनसीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से दसवीं तक संस्कृत को अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज तक उन निर्देशों का पालन नहीं हुआ है।
संघ का आरोप है कि इस तरह की प्रशासकीय और शासकीय कार्यप्रणाली से आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका भी प्रतीत होती है।
छत्तीसगढ़ संस्कृत शिक्षक संघ ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत से भेंट कर सौंपा मांग पत्र
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