नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव का असर अब भारत समेत पूरी दुनिया के तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के बीच देश में पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आम लोगों को महंगे पेट्रोल-डीजल का झटका लग सकता है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बने तनावपूर्ण हालात ने वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित किया है। दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते इस रूट पर खतरा बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है । विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
हालांकि केंद्र सरकार या तेल कंपनियों की ओर से फिलहाल कीमत बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार के संकेत आम लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं।