रायपुर। तस्वीर विचलित कर सकती है, लेकिन इस घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए इसे दिखाना जरूरी है। राजधानी के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सिकल सेल से पीड़ित एक महिला की अस्पताल पहुंचने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, महिला को ऑटो से अस्पताल लाया गया, लेकिन उसे स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजन उसे गोद में उठाकर हेल्प डेस्क तक ले गए।
बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने के बाद करीब 33 मिनट तक पर्ची बनने का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान महिला का पति और उसकी दो साल की बच्ची मदद के लिए इधर-उधर भटकते रहे। इलाज शुरू होने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया।
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां प्रदेशभर से गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इमरजेंसी स्थिति में मरीज को स्ट्रेचर नहीं मिलना और पर्ची बनने में इतना समय लगना अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी।
पति और मासूम बच्ची मदद के लिए भटकते रहे
मृतका के पति के सामने एक ओर पत्नी की बिगड़ती हालत थी, वहीं दूसरी ओर दो साल की बच्ची के साथ अस्पताल में मदद के लिए भटकने की स्थिति बनी रही। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज और जरूरी सहायता नहीं मिल सकी।
घटना के बाद अब अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था, मरीजों के लिए स्ट्रेचर की उपलब्धता और पंजीयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही यह भी सवाल है कि गंभीर मरीजों के लिए पर्ची और इलाज की प्रक्रिया को कितना आसान और त्वरित बनाया गया है।