जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में 13 साल बाद शनिवार, 5 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष NIA कोर्ट के न्यायाधीश अजय सिंह ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास के मामले में आरोपियों को दोषी माना है।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ देंगा और महादेव नाग शामिल हैं।
16 सितंबर को होगी सजा पर सुनवाई
अदालत ने दोष सिद्ध होने के बाद अब सजा सुनाने के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है। इसी दिन जजमेंट की कॉपी भी अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि दोषी आरोपियों को किस-किस धारा में कितनी सजा दी जाती है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
मामला 25 मई 2013 का है। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, दिनेश पटेल और उदय मुदलियार समेत कई लोगों की मौत हुई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपियों के खिलाफ IPC, Arms Act, Explosive Substances Act और UAPA की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया।
कांग्रेस ने फैसले को बताया ‘आधा-अधूरा न्याय’
अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने NIA के फैसले को ‘आधा-अधूरा न्याय’ बताया।
उन्होंने कहा कि NIA ने अदालत के सामने जो तथ्य और रिपोर्ट रखी, अदालत ने उसी आधार पर फैसला दिया है, लेकिन घटना के पीछे कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच नहीं हुई।
कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए पूछा कि झीरम हमले का मास्टरमाइंड कौन था, VIP सुरक्षा किसने हटाई, VIP रूट किसने बदलवाया और हमले की योजना किसने बनवाई? कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि कुछ बड़े नक्सलियों के नाम FIR में दर्ज होने के बाद उन्हें क्यों हटाया गया और सरेंडर करने वाले कथित नक्सलियों से NIA ने पूछताछ क्यों नहीं की।
कांग्रेस ने मांग की है कि झीरम घाटी मामले में राज्य की SIT से दोबारा जांच कराई जाए और राजनीतिक षड्यंत्र की भी जांच हो। पार्टी का कहना है कि घटना में शामिल वास्तविक लोगों को भी सजा मिलनी चाहिए।
अब सभी की नजर 16 सितंबर को होने वाली सजा की सुनवाई पर है।