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Saturday, October 10, 2026
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बस से यात्रा करना पड़ सकता है महंगा, परमिट फीस 4 गुना बढ़ी; परिवहन विभाग ने बदले कई शुल्क

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रायपुर। राज्य परिवहन विभाग ने करीब 32 साल बाद परिवहन सेवाओं से जुड़े विभिन्न शुल्कों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीयन, फिटनेस प्रमाण-पत्र और अलग-अलग तरह के परमिट से जुड़े शुल्क बढ़ाए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव बस परमिट की फीस में हुआ है, जो 2,500 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो गई है।

विभाग के मुताबिक नई शुल्क व्यवस्था में कई सेवाओं की फीस दोगुनी या उससे अधिक की गई है। इसका असर निजी वाहन मालिकों के साथ-साथ व्यावसायिक और यात्री वाहन संचालकों पर भी पड़ेगा।

प्रमुख सुविधाएं और नया शुल्क

क्र.प्रक्रिया/आवेदनपुराना शुल्कनया शुल्क
1चिकित्सा प्रमाण-पत्र जारी करना₹50₹100
2डुप्लीकेट लाइसेंस की दूसरी प्रति₹50₹100
3ड्राइविंग लाइसेंस की दूसरी प्रति₹200₹250
4व्यावसायिक वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र₹200₹300
5निजी लाइट मोटर वाहन का अस्थायी पंजीयन₹250₹500
6व्यावसायिक लाइट मोटर वाहन का अस्थायी पंजीयन₹500₹600
7दुपहिया का अस्थायी पंजीयन₹150₹300
8मोटर कैब (टैक्सी) परमिट जारी/नवीनीकरण₹1,500₹4,000
9ऑटो/टैक्सी (कैब) का अस्थायी परमिट, प्रति सप्ताह₹250₹300
10मालवाही परमिट जारी/नवीनीकरण₹2,000₹5,000
11मालवाही का नेशनल परमिट जारी/नवीनीकरण₹2,000₹6,000
12यात्री बस परमिट जारी/नवीनीकरण₹2,500₹10,000
13———
14किसी भी परमिट की दूसरी प्रति जारी₹500₹1,000
15RTO निर्णय/आदेश के खिलाफ याचिका शुल्क₹200₹2,000

देर से परमिट रिन्यू कराने पर बढ़ेगा जुर्माना

नई व्यवस्था में परमिट की समय सीमा खत्म होने के बाद उसका नवीनीकरण कराने पर देरी के हिसाब से अतिरिक्त शुल्क देना होगा। यानी परमिट जितने समय तक लंबित रहेगा, शुल्क और जुर्माने का बोझ उतना बढ़ सकता है।

बस संचालकों पर सीधा असर

नई दरों के मुताबिक यात्री बस परमिट की फीस ₹2,500 से बढ़कर ₹10,000 हो गई है। इसी तरह मोटर कैब परमिट का शुल्क ₹1,500 से बढ़कर ₹4,000 और मालवाही परमिट ₹2,000 से बढ़कर ₹5,000 किया गया है।

विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 3,800 बसें परमिट वाली हैं। वहीं करीब 500 बसें 300 किलोमीटर तक चलने वाली हैं। शहरों में चलने वाली बसों के नए परमिट आवेदन के लिए 10,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

किसानों और कुछ वर्गों को राहत

नई शुल्क व्यवस्था में किसानों के लिए राहत का भी प्रावधान रखा गया है। किसानों द्वारा अपने नाम के ट्रैक्टर या ट्रॉली के लिए संबंधित परमिट की प्रक्रिया कराने पर शुल्क नहीं लिए जाने की बात कही गई है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को भी कुछ मामलों में तय फीस का आधा भुगतान करना होगा।

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