रायपुर। रावण का पुतला हर साल दशहरे पर जलाया जाता है, लेकिन इस बार रावण के अधिकारों का मामला छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग तक पहुंच गया। यहां एक शिकायतकर्ता ने रावण के मानव अधिकारों के हनन का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि अगर रावण का पुतला जलाया जाता है, तो दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता?

छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने इस अनोखी शिकायत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आयोग में अब तक करीब 74 हजार मामले आ चुके हैं। इनमें दो से तीन हजार आवेदन फर्जी या आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर के विषयों से जुड़े हैं। इन्हीं में एक शिकायत रावण के मानव अधिकारों को लेकर भी आई थी।
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि अगर रावण का पुतला जलाया जाता है, तो दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता, जबकि उसे रावण से बड़ा पापी माना जा सकता है। इस पर आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि रावण मानव नहीं था और यह मामला आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक के मुताबिक, शिकायतकर्ता को उचित फोरम पर जाने की सलाह दी गई। इस अनोखी शिकायत ने आयोग में पहुंचे हजारों मामलों के बीच सबका ध्यान खींचा है।