रायपुर, कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के मोर गांव मोर पानी महा अभियान के अंतर्गत “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है।
इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल बताया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएं स्पष्ट होती हैं।
पृष्ठभूमि
कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित रहता था।
कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा
“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया। साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाई गईं।
सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय
महिलाओं ने नीर नायिका और युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त किया गया, जिससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना।
2025 की उपलब्धियां (जल पुनर्भरण)
जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230–235 बड़े तालाबों (12000 m³/तालाब) और 1800 से अधिक डबरियों (1500 m³/डबरी) के बराबर है। (गणनाएं वैज्ञानिक मानकों पर आधारित हैं।)
भूजल स्तर में सुधार
CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
2026 में प्रगति
20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं, जिनमें 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएं शामिल हैं।
कलेक्टर का वक्तव्य
जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—
“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
अंततः, कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में बदला जा सकता है। यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की सराहना
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