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Sunday, March 1, 2026
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महाशिवरात्रि पर खरौद के लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, लक्ष्मणेश्वर सेवा समिति ने किया फल वितरण

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खरौद (जांजगीर-चांपा)। छत्तीसगढ़ की काशी कही जाने वाली ऐतिहासिक नगरी खरौद में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रातः काल से ही लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

महाशिवरात्रि के अवसर पर लक्ष्मणेश्वर सेवा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच फल वितरण किया गया। इस सेवा कार्य में समिति के सदस्य धरम सिदार (जिला महामंत्री, अनुसूचित जनजाति मोर्चा), नितिन यादव, प्रखर यादव, रुपेश सोनी, पुष्पराज त्रिपाठी, राजदीप थवाईत, जितेंद्र देवांगन, हरीश गोस्वामी, दीनदयाल यादव, विजय यादव, राघवेंद्र यादव, योगेश भेडपाल, धनेश्वर मिर्जा, विवेंद्र यादव, परमेश्वर यादव, धमेंद्र सिदार, हेमंत यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

मंदिर की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता
खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अपने अद्वितीय शिवलिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां विराजमान शिवलिंग में सवा लाख (1.25 लाख) छोटे-छोटे छिद्र हैं, जिसके कारण इसे ‘लखेश्वर’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि वनवास काल में लक्ष्मण जी ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।

मंदिर में स्थित एक विशेष छिद्र को ‘अक्षय कुंड’ कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए, यह कभी भरता नहीं और पाताल लोक से जुड़ा है।
स्थापत्य की दृष्टि से यह मंदिर ईंट और पत्थरों से निर्मित है। मंदिर के स्तंभों पर रामायण कालीन दृश्य, अर्धनारीश्वर, भगवान विष्णु, द्वारपाल और गंधर्वों की आकर्षक आकृतियां उकेरी गई हैं। मंदिर परिसर में 8वीं शताब्दी के शिलालेख भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें कलचुरी राजाओं के काल में इसके जीर्णोद्धार का उल्लेख मिलता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां एक लाख चावल (लक्ष चावल) अर्पित करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अपनी ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्ता के कारण यह मंदिर रामेश्वरम के समान प्रतिष्ठा रखता है और पूरे प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
महाशिवरात्रि पर सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। देर रात तक भक्तों के दर्शन और पूजन का क्रम जारी रहने की संभावना है।

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