रायपुर, बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने किया। कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
पहले सत्र में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से आईं शाइस्ता शाह ने बच्चों की सुरक्षा, स्कूलों में संरक्षण और पॉक्सो ट्रैकिंग पोर्टल की जानकारी दी। वहीं दूसरे सत्र में रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने बच्चों से जुड़े मामलों और कानून-व्यवस्था की संवेदनशील भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा, “बच्चे राष्ट्र की नींव हैं, जो इतने valuable हैं, वे vulnerable क्यों हैं—इस पर गंभीर मंथन जरूरी है।” उन्होंने बाल गृहों को बच्चों का “घर” मानते हुए उनके साथ पारिवारिक व्यवहार करने पर जोर दिया।
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा, “हर बच्चा अपना है, यही सोच भविष्य की दिशा तय करेगी।” उन्होंने बच्चों को सही दिशा देने और समग्र विकास के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।
कार्यशाला में किशोर न्याय अधिनियम 2015 के विभिन्न प्रावधानों, बाल संरक्षण, नशामुक्ति, बाल तस्करी रोकथाम और ‘आफ्टर केयर’ योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने की शपथ भी दिलाई गई।
इस अवसर पर आयोग सचिव प्रतीक खरे, SJPU हेड रश्मीत कौर, एडिशनल कमिश्नर पुलिस कांबले सहित सभी जिलों के DEO, DCPO और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के समन्वय से बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा।