नई दिल्ली/पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित रूप से राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि यदि वे दिल्ली की सियासत का रुख करते हैं, तो राज्य की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कार्यशैली को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए किसी नाम पर अभी स्पष्टता नहीं है। पार्टी ने पहले भी कई राज्यों में ऐसे चेहरे सामने रखे हैं, जिनके नाम की चर्चा पहले नहीं थी। ऐसे में बिहार में भी चौंकाने वाला फैसला हो सकता है।
पिछड़े वर्ग से ही होगा अगला मुख्यमंत्री?
बिहार के जातीय समीकरण को देखें तो माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद किसी पिछड़े वर्ग के नेता को ही मिल सकता है। राज्य की राजनीति में सामाजिक संतुलन अहम भूमिका निभाता है। कुर्मी, कोइरी, यादव और अन्य पिछड़ी जातियों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। ऐसे में किसी सवर्ण चेहरे की संभावना कम आंकी जा रही है।
संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में
वर्तमान में दो उपमुख्यमंत्री हैं, जिनमें सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं Samrat Choudhary। उनके पास गृह विभाग भी है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी चर्चा में है। वे यादव समुदाय से आते हैं और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं।
पटना दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी संभावित चेहरों में लिया जा रहा है।
क्या बीजेपी फिर चौंकाएगी?
बीजेपी नेतृत्व अक्सर अंतिम समय में ऐसा निर्णय लेता है, जो राजनीतिक गलियारों में अप्रत्याशित होता है। ऐसे में यह भी संभव है कि किसी नए या अपेक्षाकृत कम चर्चित नेता को मौका मिले।
फिलहाल सबकी नजर पार्टी आलाकमान के फैसले पर टिकी है। इतना तय माना जा रहा है कि यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो वह बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।