नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में प्रतिबंधित चीनी मांझे को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। दिल्ली में चीनी मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर पहले से प्रतिबंध है, इसके बावजूद इसकी अवैध बिक्री और इस्तेमाल के मामले सामने आ रहे हैं।

हाल ही में भजनपुरा इलाके में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से एक साढ़े तीन साल के बच्चे के घायल होने की घटना सामने आई। इसके बाद एक बार फिर चीनी मांझे के खिलाफ कार्रवाई और जागरूकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दिल्ली पुलिस ने जुलाई में भजनपुरा इलाके में कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री और वितरण के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके कब्जे से 34 रोल मांझा बरामद किया।
इससे पहले सीलमपुर में भी पुलिस ने 59 चर्खियां बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत FIR दर्ज की गई। पुलिस अवैध सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
चीनी मांझा सिंथेटिक सामग्री से बना होता है और कई मामलों में इसे कांच या धातु जैसे पदार्थों से धारदार बनाया जाता है। इसके कारण राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा होता है।
क्या है सजा का प्रावधान? चीनी मांझे पर प्रतिबंध के उल्लंघन को लेकर पुराने पर्यावरण कानून के तहत पांच साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, मौजूदा मामलों में किस कानूनी धारा के तहत कार्रवाई होगी, यह मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए इसे सीधे तौर पर “पतंग उड़ाने पर पांच साल की जेल” कहना भ्रामक हो सकता है।
दिल्ली पुलिस की ओर से भी लोगों से प्रतिबंधित चीनी मांझे का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की जा रही है। पतंग उड़ाने के लिए सुरक्षित और अनुमत धागे का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।