25.1 C
Raipur
Monday, August 31, 2026
Homeछत्तीसगढ़खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक...

खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन: CM साय

Date:

Related stories

बिजली के निजीकरण को लेकर कांग्रेस फैला रही भ्रम : CM विष्णुदेव साय

CM साय बोले- रूटीन प्रक्रिया को निजीकरण से जोड़ना...

नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़: CM साय

नारी शक्ति सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट...

क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता से मजबूत होगी भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह बात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता जरूरी है।

CM साय ने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का किया शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) और इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता जरूरी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत के लिए आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

रक्षा से AI तक नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में कई स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि AI, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है।

छत्तीसगढ़ में विकसित होगी पूरी मिनरल वैल्यू चेन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच केवल खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकार का प्रयास है कि अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिजों का प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में ही हो।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में AI आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। प्रदेश में खनिज संसाधनों की उपलब्धता इन उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर सकती है।

नई औद्योगिक नीति से निवेश को बढ़ावा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है। पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित कई सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।

खनिज राजस्व बढ़कर 16 हजार करोड़ से अधिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए कार्य किए जा रहे हैं।

सतीश चंद्र दुबे बोले- क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों और आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

तोखन साहू बोले- खनन के साथ टिकाऊ विकास भी जरूरी

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है।

निवेशकों को मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट

मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है।

उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है। सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है।

देश में अब तक 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी

भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।

ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट और 2,800 KM जियोलॉजिकल सर्वे

खनिज विभाग के संचालक एवं CMDC के प्रबंध संचालक रजत बंसल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को करीब 16,700 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे करीब 4 लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की उम्मीद है।

ई-रेत संगवारी से PM आवास हितग्राहियों को सुविधा

ई-रेत संगवारी पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।

वहीं, दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है।

CMDC के दो महत्वपूर्ण एमओयू

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके अलावा कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए CMDC और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ।

इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए NIT जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स मौजूद रहे।

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories